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ब्लॉग्स (109)
शहरअपनेपुराने बाशिंदों कोपुराने पोलीबैगों में भरकरकुडेदानों मेंफेंक आया हैवे मिल जाते हैंकभी रेल कीउन पुरानी पटरियों पे बैठेजहाँ से रेल नही गुजरतीऔर कभीपुराने उजडे बागों मेंजहाँ अब उनके सिवाकोई नही जाताउनकी जिंदगी से अबकोई नही गुजरना चाहतावे सब पुराने ... आगे पढ़ें...

कभी भी कुछ छूटता है तो तेरे छूट जाने जैसा हीं लगता है चीजों का छूटना दरअसल छूटने के उसी एक मंजर से आज भी बाविस्ता हैं उस बार की तरह हर बार गला बुक्का फाड़ती है आँख बहती है और सीना फटता सा है पर अजीब है ये किचीजें आज भी छूटती हैं रुकने और रोकने,बंधने और ... आगे पढ़ें...

तीन साल हुएजब वो चली गई थीआज भी नींद मेंमेरे हाथ उसको बिस्तर पे खोजते हैंऔर टटोलते हुएउसे न पाकरजाग जाते हैंअपने सपनो मेंकई बार पा भी लेता हूँ उसेपर मेरे जागने से पहलेहर बारवो उठ कर चली गई होती हैउसके पास वो बाहें थीजो मुझे घेर लेती थीं सोते वक्त और ... आगे पढ़ें...