कभी भी कुछ छूटता है तो तेरे छूट जाने जैसा हीं लगता है चीजों का छूटना दरअसल छूटने के उसी एक मंजर से आज भी बाविस्ता हैं उस बार की तरह हर बार गला बुक्का फाड़ती है आँख बहती है और सीना फटता सा है पर अजीब है ये किचीजें आज भी छूटती हैं रुकने और रोकने,बंधने और ...
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