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मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना था
मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना थाजिस्म से रूह पर अभी फिसला ही थाअभी देखा भी नही था उसे आंख भरकि धकेल दिया तुमने मुझे बाहर....मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना था
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Om Arya
द्वारा 3 जुलाई, 2008 8:51 AM पर पोस्टेड
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याद में
इस लड़खड़ाती रात मेंउसकी यादों की उंगली थामे चल रहा हूँउसकी यादों का जिंदा वजूदमेरे हर गिरते पल को थाम लेता हैयाद में ये राहें इतनी व्यस्त नही हैंवहाँ प्यार से चलने के लिये जगह भी है और वक़्त भीउन पर जरा बेफिक्र हो कर चला जा सकता हैयाद में उसकी लबे हैं ...
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Om Arya
द्वारा 13 मई, 2008 5:01 PM पर पोस्टेड
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वे नही आयेंगी
वो शाम का किनाराजिसके उस तरफ तुम्हारा समंदर डूब गया थाऔर जिंदगी की सारी लहरें गुम हो गयी थी उसके धुंधलके में उसी किनारे पे सारी ख्वाहिशे टूट कर बिखर गयी थीऔर मैं लौट आया थापूरा का पूरा जिस्म झोंक दिया फिरजिंदगी के कारखाने मेंपेट हथेली पे लिये घूमता ...
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Om Arya
द्वारा 20 मार्च, 2008 10:15 AM पर पोस्टेड
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