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चैनल: थोड़ा सा आसमान


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ब्लॉग्स (152)
जिंदगी अब यूँ है किसपनों के इंतिज़ार मेंनींदकभी इस करवटकभी उस करवट ... आगे पढ़ें...

वो वक्त कन्ही छूट गया है....वो वक्तजब पलको को जरा सा झुका करहम लपक लेते थेअनगिनत ख्वाबवो वक्तजब नींद के गलियारे मेंखेलते थे कित कित कभी वेऔर कभी पिट्टोतब सब कुछ ख्वाबो के वश में थावे सींचते थे हमारी आंखों को पानी सेऔर सवारते थेनींद कोतब आँख पर चढ़ कर ... आगे पढ़ें...

एक नींद सेदूसरे नींद तक की यात्रा मेंभटक गए हैं हमारे कुछ ख्वाबवे जो भटके हुए ख्वाब हैंउनके अक्सकभी दरवाजे के उस उस पार सेकभी खिडकी, कभी रोशनदान सेकभी हमारे चेहरो सेकही ना कहीं से वे लगातार झांकते रहते हैंवे दिखाई तो पड़ते हैंपर लाचारी ये हैकि उन्हे अब ... आगे पढ़ें...

एक असहाय क्रन्दन उस बच्चे की भाँति जो किसी मेले में गुम गया है या फिर जिसे छोड़ कर चली गयी है माँ उसकी, उसके देखते वो रो रही है वो रो रही है तुम्हारे अभाव मेंछाती में सांस पूर नही रहा वो रो रही है बुक्का फाड़ कार उसकी आँखें अब जार-जार... तार-तार... डर है ... आगे पढ़ें...

मेरे प्रेम पे वो ठहरता नहीमगर फिराक में रहता हैकि अपनी वासना सेपछाड़ता रहे मुझेअपने ताकत के तल्ले से,मसल देता है मुझेजैसे हीं उसके पीने क़ीतलब मिट जाती हैवो मुझे गोल-गोल घूमाता हैछल्ले से छल्ला निकालता हैमुझे धुआँ बनाकर,खेलने क़ी धुन में रहता है अक्सरवो ... आगे पढ़ें...

तुम अपनी जगह बिलकुल सही हो. तुम्हारा कहना बिलकुल सही, पर मेरे पास फुरसत इतनी सी है कि रुक कर थोडा हांफ सकूं अब तुम्ही बताओ कि कोशिश भी करून तो हांफते हुए कितना और कैसा प्यार किया जा सकता है!!! आगे पढ़ें...

ऐसा नही है के ये धुन्ध नया है ये धुन्ध तब भी था जब सुबह पाँच बजे मैं निकल जाता था ट्यूशन के लिए साइकिल पे जाडे के दिनों मेंये धुन्ध तब भी था जब मैं बाढवीं की परीक्षा में पहले निस्कासितऔर फिर बाद में अनुतीर्ण रह गया था ये धुन्ध तब भी था जब मैं एक उमरदराज़ ... आगे पढ़ें...

देखती रहती हूँ उसका रूप जैसे जाड़े में वो हो कोई धुप और सेंक कर सो जाना चाहती हूँ छु लेती हूँ उसकी देह इस तरह कि लगे यूँ हिन् अनजाने में छु गयी हो पता नहीं अपना स्पर्श देने के लिएया उसकी छुअन पाने लिए अपनी धडकनों कों उसके करीब ले जा कर छोडा है कई बार कि ... आगे पढ़ें...

तुम्हारे बहाव में बह जाने के लिए, मैं अक्सर जाता हूँ अपने किनारे से चलते हुए तुम्हारे मंझधार तक मैं खाली कर के हमेशा रखता हूँ कुछ स्थितियां ताकि तुम आओ तो उनमें कुछ भर सको उनमें वो जो कुछ पल हैं मेरे पास तुम्हारी ताप वाले उनमें जाकर स्थिर हो रहना मुझे ... आगे पढ़ें...

नही मालूम कहाँ से आ रहे हैं वे मगर उनकी रफ्तार बहुत तेज है और वे छा जाने की हैसियत रखते हैं हो सकता है वे वहाँ पहले से उपस्थित हों इतिहास के पन्नो में दबे हुए हमारी नज़रों के दायरे के बाहर या फिर हो सकता है वे चीखे हों पहले पर सन्नाटे के उपर नही पहुँचने ... आगे पढ़ें...

अपनी लौ से लबरेज हथेलीरख दो आजमेरी तनहा हथेली मेंबरसों से परत-दर-परतजमा हुआ मोमपिघला करबहा दोमेरी आँखों के कोरों सेओस सी चिकनीऔर पारदर्शी सुबहउगा दो मेरी आँखों मेंसमझ लोअपनी हथेली सेमेरी हथेली कोंमेरा होना अब सिर्फ तुम पर है आगे पढ़ें...

इश्क के मेंड पे, बैठते थे वे छिप-छिप कर.एक दूसरे की सांस सुनकरवे जीते थेऔर बदन में उनके,ऊठती थी एक दूसरे की आहटे खेत में बीज बोया करते थे वेमुहब्बत के आंखो- आँखों मेंखेत से उगती थी उम्मीदे ढेरोपूरनमाशी का चांदलाल होता थाउसके साथ्-साथजब चूमता था वो उसकोएक ... आगे पढ़ें...

अब बहुत थोड़े से दिन बचे हैं बहुत थोड़े से दिन, जब कुहरे में डुबे रहेंगे ये गलियाँ, ये सड़कें ये समय. आर पार देखने के लिए सूरज को आँखें फाडनी पड़ेगी, नही सूझेगा शहर का पुराना घंटाघर, दूर-दूर तक नजर नही आएंगे ये खिलखिलाते चटकदार दृश्य, दांत भींचे ऊँकरू ... आगे पढ़ें...

तुमने थाम रखा है मेरा नाम, बचाए रखा है दिल मे अपनी वो कौफी वाली शाम मैं भी कुछ देर के लिए हीं सही, रोज रखता हूँ खुद को तेरे धूप में संभाले रखा है तुमने, मेरे उस हौसले का स्पर्श, जब पहली बार मैने तुम्हारी हथेली अपने बाजुओं में लिया था, औरतुमने रहने दिया ... आगे पढ़ें...

मैं इतना हूँ गतिमानकि हूँ न्युटन के गुरुत्वाकर्षण नियमों से परेऔर इतना निरपेक्षकि आइंस्टीन है स्तब्ध.मैं हूँतेरे इश्क में. आगे पढ़ें...

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