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चैनल: थोड़ा सा आसमान


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ब्लॉग्स (152)
उनकी छुअन अब नही लगतीं वे खाली-खाली से रह गये मौसम हैं पेड़ो पे लद भी जाएँ तो शाखें नही झुकतीं वो जो धरती के सबसे नायाब मौसम थे, वो भरे-पुर महकते मौसम फ़िज़ाओं से जाने कैसे गायब होते गये. अब ना तो उनके स्पर्श घुमड़ते हैं आसमान में और, ना हीं उनकी बूंदे ... आगे पढ़ें...

एक टुकड़ा शब्द लहू-लुहान तड़फर्ता रहा देर तक और दम तोड़ दिया आखिर. सारे आवाज़ एक बार फिर तोड़ दिए थे फर्श पे पटक के उसने. सन्नाटा दीवार के कानो पे बर्फ हो गया था और जिंदा बचे अल्फाज़ पूरी ताकत से अपनी कंपकंपी संभाल रहे थे. ऐसा हीं हो जाया करता था अक्सर. ... आगे पढ़ें...

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