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चैनल: थोड़ा सा आसमान


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ब्लॉग्स (152)
शहरअपनेपुराने बाशिंदों कोपुराने पोलीबैगों में भरकरकुडेदानों मेंफेंक आया हैवे मिल जाते हैंकभी रेल कीउन पुरानी पटरियों पे बैठेजहाँ से रेल नही गुजरतीऔर कभीपुराने उजडे बागों मेंजहाँ अब उनके सिवाकोई नही जाताउनकी जिंदगी से अबकोई नही गुजरना चाहतावे सब पुराने ... आगे पढ़ें...

कभी भी कुछ छूटता है तो तेरे छूट जाने जैसा हीं लगता है चीजों का छूटना दरअसल छूटने के उसी एक मंजर से आज भी बाविस्ता हैं उस बार की तरह हर बार गला बुक्का फाड़ती है आँख बहती है और सीना फटता सा है पर अजीब है ये किचीजें आज भी छूटती हैं रुकने और रोकने,बंधने और ... आगे पढ़ें...

तीन साल हुएजब वो चली गई थीआज भी नींद मेंमेरे हाथ उसको बिस्तर पे खोजते हैंऔर टटोलते हुएउसे न पाकरजाग जाते हैंअपने सपनो मेंकई बार पा भी लेता हूँ उसेपर मेरे जागने से पहलेहर बारवो उठ कर चली गई होती हैउसके पास वो बाहें थीजो मुझे घेर लेती थीं सोते वक्त और ... आगे पढ़ें...

तुम नही हो अब यहाँजहाँ तक पहुँचते हैं मेरे हाथवहां तक नही हो तुमबस तुम्हारा अभाव है यहाँ वहाँ बिखरा हुआ तुम्हारे अभावजनित दुःख मेंमुझे रोना हैफूट-फूट कर तुम्हारे छाती में सर घुसा करकिसी छिरियाये हुए बच्चे की भांतिअपना हाथ-पाँव-माथा पटकते हुएअपनी पूरी ताकत ... आगे पढ़ें...

खिड़कियाँ थींऔर उनपे परदे थे औरपरदे सिर्फ़ इसलिए नही थे किखिड़कियाँ थीबल्कि इसलिए कि उन खिड़कियों के उस तरफ़जवान होती हुईं कुछलटों वाली लड़कियां थींइन लटों वाली लड़कियों के फिराक मेंहम आते-जातेखिड़कियों की तरफ़ झांकते -ताकतेकभी कभी उनमें से कुछ ... आगे पढ़ें...

(1)कुछ रंग हैं कुवाँरेरखे मेरे पासइस होली पेसोंचता हूँनिकालूँ उन्हेंपर तभी जबतुम अपनी मांग सामने कर दो(2)आज होली के दिन आओअपने होंठो पे रंग रख के,गर तेरी इजाज़त होतेरे लबों पेअपना गुलाबी इश्क रख दूँ(3)होली आने केबहुत पहले से हींहवा हर ओरफैला रही ... आगे पढ़ें...

जिंदगीजो भी उगा देतुम्हारी मिटटी मेंअपना लो उसेजिन्दगीजो भी पका देतुम्हारे पतीले मेंखा लो उसेजिंदगीजो भी सुना देतुम्हारे कानो मेंसुर दो उसेजिंदगीजो भी दिखा देमान लो सच उसेपरमात्मा के बनाये जीवन मेंपरमात्मा हीं दीखता है,परमात्मा हीं बजता है,परमात्मा ही ... आगे पढ़ें...

जिंदगीजो भी उगा देतुम्हारी मिटटी मेंअपना लो उसेजिन्दगीजो भी पका देतुम्हारे पतीले मेंखा लो उसेजिंदगीजो भी सुना देतुम्हारे कानो मेंसुर दो उसेजिंदगीजो भी दिखा देमान लो सच उसेपरमात्मा के बनाये जीवन मेंपरमात्मा हीं दीखता है,परमात्मा हीं बजता है,परमात्मा ही ... आगे पढ़ें...

मैं चाहता हूँकि मेरा बहाव होतुम्हारे सागर की तरफ़उमड़ता-उफनताबदहवा... आगे पढ़ें...

किससे मिलूंऔर किससे छिप कर निकल जाऊंकि मिलने परकौन मुस्कुराएगा एक सच्ची मुस्कानकिससे खुलूंऔर किससे नहीकि खुलने परकौन नही उठाएगाफायदा मेरे कमजोरियों काकिसे दूँ उंगलीऔर किसे हाथकि हाथ बढ़ाने परकौन नही चाहेगा मेरे पहुँचा पकड़नाक्या करूँ मैंक्या वास्ता रखने के ... आगे पढ़ें...

जितनी बनाई मैंनेवे सब टूटीकुछ वजह से,कुछ बेवजह भीफ़िर उन्हें जोड़ा भीजो टूट गयीं थींकुछ जुड़ीं भी, कुछ नही भीजो जुड़ींवे फ़िर से भी टूटींउनके अलावा वो भी टूटींजो मैंने नही बनाईपर जो अपने आप बनी हुई थीं पहले से हींआज की तारीख मेंकुल जमा एक भी नही हैजो टूटी नही ... आगे पढ़ें...

(किसी ने कहा की कुछ लोग हीं बे-मौसम होते हैं, उसकी इस बात से ताल्लुक रखते हुए...)जैसे बे-मौसम आंधियां होती है,ओले पड़ते हैंया फ़िर बे-मौसम बरसात होती हैठीक वैसे हींकुछ लोग भी बे-मौसम होते हैंजो, अपने काल और स्थान से चूक गए होते हैंसारे ग्रह, राशियां , ... आगे पढ़ें...

शाम के इस भूरे बदन सेआ-आकर टकरा रही हैं बार-बारपूरी गति से,कई तरह के रेतीले भावों से सनी।मटियामेट कर रही हैं एक के बाद एक, सारी ख्वाहिशेंआज नही रुकेंगी ये लहरें ....अभी से कुछ देर पहले हींवो पोत गया हैडूबते सूरज के चेहरे पे बहुत सारा मटमैला बादलतोड़ कर ... आगे पढ़ें...

चाँद ने,लगाई बिंदी माथे पेओढे गहने और कपड़ेमेंहदी लगे हाथो में पहने कंगनमन पे, पहले का सारा पहना हुआउतार दियाऔर सूरज की लपटों के सात फेरे ले लिएखामोश लबों पे उठती हुई टीसऔर कंठ में रुकी हुई हूकअनसुनी कर दी गई थी पहले हींबहरा आसमान ! आगे पढ़ें...

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