Om Arya द्वारा 8 अप्रैल, 2008 5:24:00 PM IST पर पोस्टेड
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गुजरता रहेगा वक़्त पहले की तरहपर मौसम टंगे रहेंगे उन्ही सुखे पत्तों परआर पार जाती रहेंगी झोंके बारिशो केलहू के तपिश और दबाब कम नही होंगे पसरती रहेगी धूप छत और आंगन के कंधों परपर छू नही पायेगी उनकी छूअन सीलनो और दीमको कोबहुत सारा पानी बह गया होगा तब तकपर ... और पढ़ें...
Om Arya द्वारा 3 अप्रैल, 2008 11:08:00 AM IST पर पोस्टेड
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लिहाफ है प्यार तेराओढ के लेटता हूँ सर्दियो मेंनजरो में तेरी यादो के पन्ने हैंपलट के पढा करता हूँ छुट्टियो मेंजब मौसम सन्वरता है खिला करती हो गमले की मिट्टियो मेंगुनगुनी धूप में छत पे बैठती होऔर पीपल के नीचे गर्मियो मेंतेरी दूरी ने खराशे बनायी रेत पेऔर ... और पढ़ें...
Om Arya द्वारा 29 जनवरी, 2008 1:55:00 PM IST पर पोस्टेड
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रात को अलाव में काटा है नींद आँखों में गिरती हीं नहीं. साहिल पे गया था कल शाम को रेत पे तेरा नाम लिख के आया था. एक सुकून है तेरे नाम में याद करता हूँ तो सांस आती है. रिश्ते टूट कार अलग हो जाते हैं तो शायद दो रिश्ते बन जाते हैं. जो आशियाना हम नही बना सके ... और पढ़ें...