Om Arya द्वारा 16 फ़रवरी, 2008 3:23:00 PM IST पर पोस्टेड
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एक नींद से बिछड़ा हूँ मैंएक ख्वाब का टुकड़ा हूँ मैं चील सी उड़ती हवाएँधूप जैसे चोट खाये कुछ संग थे जो अरमान वो अरमान बिखरते गयेसाथ में बिखरा हूँ मैं एक नींद से बिछड़ा हूँ मैंएक ख्वाब का टुकड़ा हूँ मैं हालात गिरते गयेरंगरेज उजड़ते गये धूप में धुंधले ... और पढ़ें...