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चैनल: ग़जल


ब्लॉग्स (10)
ढीले नही हुए कसावअलग होकर भीशाम उदास नही हैतनहा होकर भीनज्म अपने वजूद में जिन्दा हैलफ्ज खोकर भीथमी नही है मौतखा कर ठोकर भीबीज अंकुराया हैपत्थर से होकर भीमुझे पहुंचना है वहांताउम्र चलकर भीकुछ भी नही हुआसब कुछ होकर भीतू मेरी ही हुईउसकी होकर भी आगे पढ़ें...

मैं शाम को तेरे से लू चुराअपनी नजर में तु मुझे ले जराबदन में उग रहा है तु कहीअपनी आहटे आ के सुन ले जराबुझने लगी है लपट जिंदगी कीतु अपने आग में उसे तो ले जरारात है घनी और तनहाइ टूटी हुईसुबह तक तो हौसले में ले जरामैं तेरा हूँ ये मुझे यंकी हैंतु उसे अपनी ... आगे पढ़ें...

रात गुज़रेगी आज अच्छी दिन गुजरा आज तेरे लफ़्जों के साथ बदन पे उगते रहेंगे गुलमोहर हथेली तेरी रहेगी जब तक इसके साथ देखा तो सीधा आँख से नीचे उतर गयी तेरी सूरत लिपटी थी इश्क के खयाल के साथ. सुबह काले घने गेशु में छिपी है रात आई थी घर कल अपने महबूब के साथ ... आगे पढ़ें...

तेरे जलबो में डूबता हूँ रोज तेरे जलबो की गहराई बहुत है. तेरे लम्हों का हाथ छूट गया जबसे मेरी दुनिया में तनहाई बहुत है. तुम मुड़ जाओगे ये मालूम था मुझको साथ चलने को तेरी यादों की पडछाई बहुत है तेरे कदमो में सर रखना है मुझे क्या करूं पर, तेरे कदमो की ऊँचाई ... आगे पढ़ें...

तुझे देखा है कई बार ख्वाब मेंसोचता हूँ कोई शेर लिखू तेरे किताब मेंबडी देर तक आंखे रही बेचैनजो छिपा लिया तुने चेहरा हिजाब मेंजाने कब तक लहरे रक्श करती रहीजाने किसने मिला दी समंदर शराब मेंतुमने तो खोल दी अनजाने ही में आंखो की धार कोतुम्हे क्या पता कौन बह ... आगे पढ़ें...

तू किनारे पे करना इंतेज़ार साकी मैं लौटूँगा फिर इस पार साकी बिक जाएंगे एक दिन कौडियो में सब तब भी बच जाएंगे ये बाजार साकी अरसे से महरूम रखा आँसुओं से आँखों का हूँ बड़ा मैं गुनहगार साकी तेरे घर का दरवाजा हर दफ़ा बंद मिला हम गुजरे तो तेरी गली से कई बार ... आगे पढ़ें...

वहीं पे है पडा अभी तक वो जाम साकीनिकल आया तेरे मयखाने से ये बदनाम साकीनजर में ठहरी हुई है वो तेरी महफिल अभी तकजो पी आया तेरे होठो से एक कलाम साकीहो न जाये ये परिंदा कोई गुलाम कहते हैं शहर में बिछे हैं पिंजडे तमाम साकीमुझे मालूम है मेरी गुमनामी के बारे ... आगे पढ़ें...

दिल से चले गये दर्दो काजाने क्यो बडा इंतज़ार रहता हैऔर जो बच गये हैं बैठे हैं जाम लेकेहोश इनको जरा ना-गवार रहता हैआजकल अखबार का समाचार पढते वक़्तनजर बडा ही शर्मसार रहता हैबदन के रेशे रेशे पे जिंदा हर पलतेरे बोसे का प्यार रहता हैसमंदर ने छोड दिया आना साहिल ... आगे पढ़ें...

मुद्दत से आरजू है की तेरी चाँदनी में रहूँ. तुम छेड़ो कोई तार की मैं जिसकी रागिनी में रहूँहर तरफ तेरी लिखावट हो और, मैं तो बस सदा उसकी स्याही में रहूँकभी उठे लहर तो गिरे कभी फिर उठने के लिए, मैं हमेशा उसके पानी में रहूँ. खुदा के रहेम-ओ-करम तुम पर मुसलसल ... आगे पढ़ें...

कहीं कोई मुककमल मोकां नही है जहाँ में कहीं भी चैन-ओ-आराम नही है. तुमने मसला उठाया है तो कह देता हूँ हम आशिकों से ज़्यादा कोई गुलफाम नही है. जिस साहिल के बदन पे समंदर अंगराईयाँ लेता है उस साहिल की भी कोई खुशनुमा शाम नही है आज फिर उनके जानिब से ना कोई पैगाम ... आगे पढ़ें...