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चैनल: सीलन


ब्लॉग्स (2)
घर की अलगनी पे अंबार लगता जा रहा है एक के ऊपर एक गीली सोंचों का मैने खोल दिए हैं सारे दरवाजे, खिड़कियां और छत कोई भी गुंजाइश नही छोड़ी है किसी भी धूप के टुकड़े के लिए आसान है सोंचों को गीला छोड़ देना मगर फिर कितनी देर टिकी रहेगी अलगनी !! आगे पढ़ें...

पतझर में जो पत्ते बिछड़ जाते हैं अपने आशियाने से, वे पत्ते जाने कहाँ चले जाते हैं उन सूखे पत्तों की रूहें उसी आशियाने की दीवारों पे सीलन की तरह बहती रहती है किसी भी मौसम में ये दीवारें सूखती नही ये नम बनी रहती है मौसम रिश्तों की रूहों को सूखा नही सकते. आगे पढ़ें...