Om Arya द्वारा 6 फ़रवरी, 2008 5:24:00 PM IST पर पोस्टेड
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पतझर में जो पत्ते बिछड़ जाते हैं अपने आशियाने से, वे पत्ते जाने कहाँ चले जाते हैं उन सूखे पत्तों की रूहें उसी आशियाने की दीवारों पे सीलन की तरह बहती रहती है किसी भी मौसम में ये दीवारें सूखती नही ये नम बनी रहती है मौसम रिश्तों की रूहों को सूखा नही सकते. और पढ़ें...