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चैनल: मौन के खाली घर में


ब्लॉग्स (7)
तुम्हारी जुगलबंदी मेंअक्सर बन जाती है कोई धुनतुम्हारे साथ होनामध्य रात्रि से थोड़ा पहले,जब सारे स्वर शांत हो गए होते हैं,राग मालकौंस के साथ होने जैसा हैतुम्हारे विशाल आगोश मेंएक मुलायम धुन बहती हैऔर उसपे बहता है मेरा नाजुक सा एक ख्यालतुम्हें जब से सुना ... आगे पढ़ें...

कहीं से भी, कभी भीचली आती है वो औरपालथी मार कर बैठ जाती हैघड़ी की सुइओं परवक्त कुछ देर तक दमघोंटू गले सेटिक टिक करता रहता हैऔर फ़िर बंद हो जाता है आखिरकारखूब सारा समय इकठ्ठा हो जाता हैखत्म नही होते दिनलाख भटकने पे भीऔर रात भी मुंदी पलकों के नीचे जागती रहती ... आगे पढ़ें...

रात का काफी बडा हिस्सानूर की आगोश में जागता रहा समंदर साहिल पे आकरचहलकदमी करता रहाख्वाब बिजली के खंभों के नीचेबैठे ऊंघते रहेहर तरफ से वक़्त फिसल करगिरती रही तन्हाई के अंधे कुँए मेंमौन अपने हद तक चीख करबेअवाज हो गयी आखिरकारनींद नहीं आई कल रात भीकल रात ... आगे पढ़ें...

कई यादें हैं एक से लगती हुई एक पीछे, बहुत दूर तक फैली हुई जहाँ तक नजर जाती है. जैसे पहाड़ियाँ होती हैं एक से एक लगी हुई, फैली दूर तक जहाँ पनाह पाता है सूरज शाम को कुछ यादें, जो बसी हैं बिल्कुल तराई में कभी जब हो जाती है मूसलाधार बारिश,तो उनका बहाव बदन के ... आगे पढ़ें...

हमने अपने दिल ही नही कुरेदे. ये सोंच कर कि हवा, पानी, रोशनी रोक ली जाएगी, बीज हमने दबाए ही नही माटी में और रोक दी सम्भावना किसी खूबसूरत रचना की. तब ख्वाब में उगे वे बीज वहाँ वे खिले,लहलहाए और मुस्कुराये खूब खुशबूएं बिखेरीवे बाहर भी आयी उनके पोरों से बाहर ... आगे पढ़ें...

>ये बातें जिनका अस्तित्व मौन में है जीवित हैं इस उम्मीद में कि किसी दिन तुम्हारी छुअन इन्हे मिल जाए शायद. ये बातें किसी दायरे में नहीं उनके सपने हैं निराकार इन बातों का बयान सुना जाना है अभी बाकी ये बातें फ़िज़ा में भटकती रहती है बेचैनी से साँसें ... आगे पढ़ें...

कुछ स्वर,जो लब्जों के पनाह में जगह नही पातेउनखामोश स्वरों की रूहें सदियों तक,इंतिज़ार करती हैं की शायद कभी कोई आवाज़,कोई लब्ज उसे अपना जिस्म पहना दे और उन कानों तक पहुँचा देजिनके लिए उन्हे मौन में छोड़ा गया थास्वर मरते नही वे कहीं छूट जाते हैंमौन और लब्ज ... आगे पढ़ें...