Om Arya द्वारा 7 मई, 2008 1:46:00 PM IST पर पोस्टेड
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हमने अपने दिल ही नही कुरेदे. ये सोंच कर कि हवा, पानी, रोशनी रोक ली जाएगी, बीज हमने दबाए ही नही माटी में और रोक दी सम्भावना किसी खूबसूरत रचना की. तब ख्वाब में उगे वे बीज वहाँ वे खिले,लहलहाए और मुस्कुराये खूब खुशबूएं बिखेरीवे बाहर भी आयी उनके पोरों से बाहर ... और पढ़ें...
Om Arya द्वारा 8 फ़रवरी, 2008 3:05:00 PM IST पर पोस्टेड
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>ये बातें जिनका अस्तित्व मौन में है जीवित हैं इस उम्मीद में कि किसी दिन तुम्हारी छुअन इन्हे मिल जाए शायद. ये बातें किसी दायरे में नहीं उनके सपने हैं निराकार इन बातों का बयान सुना जाना है अभी बाकी ये बातें फ़िज़ा में भटकती रहती है बेचैनी से साँसें ... और पढ़ें...
Om Arya द्वारा 6 फ़रवरी, 2008 10:16:00 AM IST पर पोस्टेड
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कुछ स्वर,जो लब्जों के पनाह में जगह नही पातेउनखामोश स्वरों की रूहें सदियों तक,इंतिज़ार करती हैं की शायद कभी कोई आवाज़,कोई लब्ज उसे अपना जिस्म पहना दे और उन कानों तक पहुँचा देजिनके लिए उन्हे मौन में छोड़ा गया थास्वर मरते नही वे कहीं छूट जाते हैंमौन और लब्ज ... और पढ़ें...