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ब्लॉग्स (177)
अपनी लौ से लबरेज हथेलीरख दो आजमेरी तनहा हथेली मेंबरसों से परत-दर-परतजमा हुआ मोमपिघला करबहा दोमेरी आँखों के कोरों सेओस सी चिकनीऔर पारदर्शी सुबहउगा दो मेरी आँखों मेंसमझ लोअपनी हथेली सेमेरी हथेली कोंमेरा होना अब सिर्फ तुम पर है आगे पढ़ें...

इश्क के मेंड पे, बैठते थे वे छिप-छिप कर.एक दूसरे की सांस सुनकरवे जीते थेऔर बदन में उनके,ऊठती थी एक दूसरे की आहटे खेत में बीज बोया करते थे वेमुहब्बत के आंखो- आँखों मेंखेत से उगती थी उम्मीदे ढेरोपूरनमाशी का चांदलाल होता थाउसके साथ्-साथजब चूमता था वो उसकोएक ... आगे पढ़ें...

कई यादें हैं एक से लगती हुई एक पीछे, बहुत दूर तक फैली हुई जहाँ तक नजर जाती है. जैसे पहाड़ियाँ होती हैं एक से एक लगी हुई, फैली दूर तक जहाँ पनाह पाता है सूरज शाम को कुछ यादें, जो बसी हैं बिल्कुल तराई में कभी जब हो जाती है मूसलाधार बारिश,तो उनका बहाव बदन के ... आगे पढ़ें...

अब बहुत थोड़े से दिन बचे हैं बहुत थोड़े से दिन, जब कुहरे में डुबे रहेंगे ये गलियाँ, ये सड़कें ये समय. आर पार देखने के लिए सूरज को आँखें फाडनी पड़ेगी, नही सूझेगा शहर का पुराना घंटाघर, दूर-दूर तक नजर नही आएंगे ये खिलखिलाते चटकदार दृश्य, दांत भींचे ऊँकरू ... आगे पढ़ें...

तुमने थाम रखा है मेरा नाम, बचाए रखा है दिल मे अपनी वो कौफी वाली शाम मैं भी कुछ देर के लिए हीं सही, रोज रखता हूँ खुद को तेरे धूप में संभाले रखा है तुमने, मेरे उस हौसले का स्पर्श, जब पहली बार मैने तुम्हारी हथेली अपने बाजुओं में लिया था, औरतुमने रहने दिया ... आगे पढ़ें...

मैं इतना हूँ गतिमानकि हूँ न्युटन के गुरुत्वाकर्षण नियमों से परेऔर इतना निरपेक्षकि आइंस्टीन है स्तब्ध.मैं हूँतेरे इश्क में. आगे पढ़ें...

इबारतें तुम्हारी, उगती रहती हैं मेरे कान टिके रहते हैं उन परये इबारतें, जो तुम्हारे फिर फिर अंकुरित होने के निशान हैं, गुमान है मेरे लिए कि तुम हरे हो अब तक कि तुम्हारी इबारतों में मेरी नमी का जिक्र होता रहता है कि तुम कहते हो ‘सब मेरी नमी की बदौलत उगता ... आगे पढ़ें...

जानती हूँ छू लूँगी तुम्हारा हृदय पहुँच जाउन्गी तुम्हारे अंतरतम् तक, कभी भी इस जनम से उस जनम तक, और तुम मुस्कुरा दोगे मेरी छुअन को महसूस करके और तब तुम्हारे अंदर क़ी पूरी कायनात गुदगुदा जाएगी और सच मानो, तमन्ना भी यही है……… इससे रत्ती भर भी ज्यादा ... आगे पढ़ें...

आदमी मुस्कुराता है मुझे फक्र हैहर मुस्कुराते हुए आदमी परनही हमेशा, कभी-कभी हीं सही पर अभी भी जारी है आदमी का मुस्कुराना मेरी कल्पना में अक्सर जीवित हो उठता है वो दृश्य जिसमें छह अरब लोग एक साथ मुस्कुरा रहे हैं उस दृश्य में धरती का आयतन वर्तमान से कई गुणा ... आगे पढ़ें...

ना कोई आर्किटेक्ट ना प्लान घर बनवा दिया पापा ने ना ड्राइंग रूम को बड़ा बनवाया ना किचेन में एग्ज़ॉस्ट फॅन के लिए जगह छोड़ीवायरिंग भी ठीक से नही करवाई पवार प्लग तो एक भी डलवाया हीं नही ऐसा अक्सर सोंचना हो जाता था जब मैं ज्यादा छोटा था और थोड़ा बड़ा हो गया ... आगे पढ़ें...

जब भी चूम लेता हूँश्वेत्-श्याम तस्वीर में तेरे होटो कोवे सुर्ख लाल हों जाती हैं आगे पढ़ें...

अपनी आँखें बढ़ा कर खींच लिया उसने नींद के उस तरफ मुझको, आवाज़ जो आने को थी बुझा दिया उसको लबों पे मेरे, उंगली रख के फिर हौले से उठा दी उसने चेहरे से हया और खोल दी गाँठे एक के बाद एक, जो अब तक बंद थी किसी संदुकची में जमी हुई साँसें पिघल गयी और जिस्म ने भी ... आगे पढ़ें...

एक लंबे समय तक अलग रह जाने के बाद, फिर से अपने शहर में लौटना काई चीजों से एक साथ जुड़ जाने जैसा होता है जो गलियाँ और रास्ते जो खिड़कियाँ और छतें जो पेड़ और बगीचे स्मृतियों में अपनी जगह बचाते-बचाते लुप्त हो रहे होते हैं अपने शहर में लौटना उन सबों को एक ... आगे पढ़ें...

मैं शाम को तेरे से लू चुराअपनी नजर में तु मुझे ले जराबदन में उग रहा है तु कहीअपनी आहटे आ के सुन ले जराबुझने लगी है लपट जिंदगी कीतु अपने आग में उसे तो ले जरारात है घनी और तनहाइ टूटी हुईसुबह तक तो हौसले में ले जरामैं तेरा हूँ ये मुझे यंकी हैंतु उसे अपनी ... आगे पढ़ें...

आँख में पकडी गयी चाँद के मैं कलसुबह वो पलके झुकाना भूल गया थावो आई तो मैने शाख बढ़ा दी अपनी वो छाओं थी इक, धूप की जो भर गयी आवाज़ उसकी, मेरे अल्फाज़ से मैने वहाँ से कुछ नज़मे निकाल ली किताब में पहले नदियाँ मिल जाती थी अब बादल बड़ी मुश्किल भींग पाते हैं ... आगे पढ़ें...

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