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11 मई, 2009


ब्लॉग्स (1)
शहरअपनेपुराने बाशिंदों कोपुराने पोलीबैगों में भरकरकुडेदानों मेंफेंक आया हैवे मिल जाते हैंकभी रेल कीउन पुरानी पटरियों पे बैठेजहाँ से रेल नही गुजरतीऔर कभीपुराने उजडे बागों मेंजहाँ अब उनके सिवाकोई नही जाताउनकी जिंदगी से अबकोई नही गुजरना चाहतावे सब पुराने ... आगे पढ़ें...