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लटों वाली लड़कियां !


खिड़कियाँ थीं
और उनपे परदे थे और
परदे सिर्फ़ इसलिए नही थे कि
खिड़कियाँ थी
बल्कि इसलिए कि उन खिड़कियों के उस तरफ़
जवान होती हुईं कुछ
लटों वाली लड़कियां थीं

इन लटों वाली लड़कियों के फिराक में
हम आते-जाते
खिड़कियों की तरफ़ झांकते -ताकते
कभी कभी उनमें से कुछ लड़कियां
लटों को हटाती हुई हमारी ओर भी ताकतीं
और फ़िर हम इस फिराक में
और आने जाने लगते

हमारा आना -जाना जब कुछ ज्यादा हीं बढ़ जाता तो
ये लटों वाली लड़कियां
मुस्कुरातीं हुई परदे खींच देतीं
और हमारी पतंगें बहुत ऊंची उड़ने लगतीं आसमान में।

ख्यालों में हम
अक्सर मुस्कुराते, गाते-बतियाते
उन खिड़कियों के पार जाके

एन वक्त पे
हम उन रास्तों पे,
बेवजह हीं निकल पड़ते
अपने-अपने साइकिलों पे होके सवार
जहाँ से उनके गुजरने की होती गुंजाइश

शाम के साथ
ये लटों वाली लड़कियां
जब उतर आतीं अपनी छतों पर
आस पास के अपने ठिकानो पे
हम बिना नागा किए खड़े मिलते
अपने अपने आकाशों पे अपना चाँद टांकते हुए

ढूंढते रहते हम
उनके चेहरों पे
प्यार से भरी आँखें
और आंखों में भरा प्यार
उन दिनों हम बहुत करते प्यार

हममें से ज्यादातर
नही जानते कि
कहाँ गयीं वो लड़कियां लटों वाली
किनसे प्यार किया उन्होंने आखिरकार
और वो कितना प्यार की गयीं
पर अंदेशा है कि
जिनको प्यार किया उन्होंने आखिरकार
वे हमारी तरह हीं
किसी और जगह और समय में
किन्हीं और हीं लटों वाली लड़कियों पे
लुटा चुके थे अपना प्यार.

प्रतिक्रियाएँ

Re: लटों वाली लड़कियां !
such me aap ne purane dino ki yaad ker wa di aap ke shbado me wo dhar dhi jo sidhe dilo ko aar-paar ker jarahi hai aap ne bahut pyar se es kavita ko anjam diya hai
Re: लटों वाली लड़कियां !
hi
अस्वीकरण