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बाहें खोलो परमात्मा !


मैं चाहता हूँ
कि मेरा बहाव हो
तुम्हारे सागर की तरफ़
उमड़ता-उफनता
बदहवास भागता
तीव्र आवेग और प्यास से भरा
दौड़ा चला जाता हो मेरा पानी
तुम्हारे अथाह्पन में समां जाने के लिए

ऐसा हो कि
तुम्हारी गहराई में गहरे उतर कर
तेरी लय ताल में बहते हुए
मेर सारे किनारे टूट जाएँ
और मुश्किल हो जाए
मेरे लिए अपना स्वयं बचाना

मैं चाहता हूँ
मैं तुझमें अवस्थित हो जाऊं
और मेरा चाहना तुम्हारा चाहना हो जाए

तुम अपनी देह में मुझे
जगह तो दोगे न परमात्मा
मैं आता हूँ
अपनी बाहें खोले रखना !

प्रतिक्रियाएँ

Re: बाहें खोलो परमात्मा !
ऐसा हो कि तुम्हारी गहराई में गहरे उतर कर तेरी लय ताल में बहते हुए मेर सारे किनारे टूट जाएँ और मुश्किल हो जाए मेरे लिए अपना स्वयं बचाना is siddata se jab aatma apane parmatma ko moun kee aawaj de rahi hai to puri kaynat bhee aatma ko parmatma me vilin hone se nahi rok sakati hai. ........radha
अस्वीकरण