मैं चाहता हूँ
कि मेरा बहाव हो
तुम्हारे सागर की तरफ़
उमड़ता-उफनता
बदहवास भागता
तीव्र आवेग और प्यास से भरा
दौड़ा चला जाता हो मेरा पानी
तुम्हारे अथाह्पन में समां जाने के लिए
ऐसा हो कि
तुम्हारी गहराई में गहरे उतर कर
तेरी लय ताल में बहते हुए
मेर सारे किनारे टूट जाएँ
और मुश्किल हो जाए
मेरे लिए अपना स्वयं बचाना
मैं चाहता हूँ
मैं तुझमें अवस्थित हो जाऊं
और मेरा चाहना तुम्हारा चाहना हो जाए
तुम अपनी देह में मुझे
जगह तो दोगे न परमात्मा
मैं आता हूँ
अपनी बाहें खोले रखना !
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