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21 फ़रवरी, 2009


ब्लॉग्स (1)
शाम के इस भूरे बदन सेआ-आकर टकरा रही हैं बार-बारपूरी गति से,कई तरह के रेतीले भावों से सनी।मटियामेट कर रही हैं एक के बाद एक, सारी ख्वाहिशेंआज नही रुकेंगी ये लहरें ....अभी से कुछ देर पहले हींवो पोत गया हैडूबते सूरज के चेहरे पे बहुत सारा मटमैला बादलतोड़ कर ... आगे पढ़ें...