चाँद ने,लगाई बिंदी माथे पेओढे गहने और कपड़ेमेंहदी लगे हाथो में पहने कंगनमन पे, पहले का सारा पहना हुआउतार दियाऔर सूरज की लपटों के सात फेरे ले लिएखामोश लबों पे उठती हुई टीसऔर कंठ में रुकी हुई हूकअनसुनी कर दी गई थी पहले हींबहरा आसमान !
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