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ख्याल टूटे हुए से


दुःख पे पाँव अगर पड़ जाए
तो दुख बिदक कर काट लेते हैं ।

नज्में सब पीलीं पड़ गई हैं
जाने कब की ये किताब है।

तुम्हारे मन में उमस है, इसलिए
मुझ तक आने के रास्ते सारे चिपचिपे।

अब बस मैं एक रूह हूँ
जीने के लिए बदन उतारने पड़े।

हमने अपना एक जिस्म बनाया है
अब बस एक रूह की आरजू है।

आंखों ने छितकिनी चढा ली है
नींद -ख्वाब सब बाहर।

अभी अभी फ़िर से कोई ख्याल टूटा है
चटखने की आवाज फ़िर से आई है

प्रतिक्रियाएँ

Re: ख्याल टूटे हुए से
इतनी जल्दी नकारात्मक सोच कैसे आ जाती है आपकी रचना मे समझ मे नही आती है. जैसे एक किश्त धुप ...... जिसमे साकारात्मकता दीखती है वही इजहार... मे पुरी एनर्जी दिखती है. आचनक दुख और निराशा क्यो हावी हो जाती है. दुखी करता है. आप खुश रहते हो तो अच्छे लिखते हो .....please keep smilingl
Re: ख्याल टूटे हुए से
achchha laga aapko track karte hue dekh kar
अस्वीकरण