लब्ज सुन लिए गए थे ...कायनात की सारी आवाजों नेउन तीन लब्जों के लिएसारी जगहें खाली कर दी थीहोंठों पे सदियों से जमा वजनउतर गया थाउसके भीतर कोई नाच उठा थाजो नाचता हीं जा रहा था लगातारलगातार...