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ढीले नही हुए कसाव

ढीले नही हुए कसाव
अलग होकर भी

शाम उदास नही है
तनहा होकर भी

नज्म अपने वजूद में जिन्दा है
लफ्ज खोकर भी

थमी नही है मौत
खा कर ठोकर भी

बीज अंकुराया है
पत्थर से होकर भी

मुझे पहुंचना है वहां
ताउम्र चलकर भी

कुछ भी नही हुआ
सब कुछ होकर भी

तू मेरी ही हुई
उसकी होकर भी

अस्वीकरण