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सिर्फ तुम पर है !!!


अपनी लौ से लबरेज हथेली
रख दो आज
मेरी तनहा हथेली में

बरसों से परत-दर-परत
जमा हुआ मोम
पिघला कर
बहा दो
मेरी आँखों के कोरों से

ओस सी चिकनी
और पारदर्शी सुबह
उगा दो मेरी आँखों में

समझ लो
अपनी हथेली से
मेरी हथेली कों

मेरा होना अब
सिर्फ तुम पर है

प्रतिक्रियाएँ

Re: सिर्फ तुम पर है !!!
bahut sundar... aapki kavitayo ko mehsus kar pati hu mai...
Re: सिर्फ तुम पर है !!!
मै भी, मैं भी अकसर छुआ जाता हूँ आपकी कविताओं से, मैं सिर्फ कह नहीं पाता
Re: सिर्फ तुम पर है !!!
kya aapne mera naya blog padha hai?? Ye Poonarjanm (REBIRTH) ki satya ghatna par aadhaarit ek prem kahani hai!!! http://naayika.mywebdunia.com/
Re: सिर्फ तुम पर है !!!
मैं कविताये ही पढ पाता हूँ. आपके पूछने पे कोशिश की. शायद आप नायिका की बात कर रही है. पर चित्रों की वजह से असुविधा हों रही है समझने में. ध्यान से पढ के ही प्रतिक्रिया दूँगा
Re: सिर्फ तुम पर है !!!
एक हसीन लडकी की तरह खुबसुरत है,आपकी कविता.
अस्वीकरण