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<< आज की गाथा
हमारा रूकना जरूरी है >>
सिर्फ तुम पर है !!!
प्रतिक्रियाएँ[5]
Om Arya
द्वारा 27 नवंबर, 2008 11:26:00 AM IST पर पोस्टेड
#
अपनी लौ से लबरेज हथेली
रख दो आज
मेरी तनहा हथेली में
बरसों से परत-दर-परत
जमा हुआ मोम
पिघला कर
बहा दो
मेरी आँखों के कोरों से
ओस सी चिकनी
और पारदर्शी सुबह
उगा दो मेरी आँखों में
समझ लो
अपनी हथेली से
मेरी हथेली कों
मेरा होना अब
सिर्फ तुम पर है
चैनल
:
थोड़ा सा आसमान
टैग्स
:
प्रेम
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Re: सिर्फ तुम पर है !!!
N Shaifaly
द्वारा 27 नवंबर, 2008 11:34:46 AM IST पर टिप्पणी
#
bahut sundar... aapki kavitayo ko mehsus kar pati hu mai...
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Re: सिर्फ तुम पर है !!!
Om Arya
द्वारा 27 नवंबर, 2008 11:45:26 AM IST पर टिप्पणी
#
मै भी, मैं भी अकसर छुआ जाता हूँ आपकी कविताओं से, मैं सिर्फ कह नहीं पाता
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Re: सिर्फ तुम पर है !!!
Shaifaly
द्वारा 27 नवंबर, 2008 3:46:37 PM IST पर टिप्पणी
#
kya aapne mera naya blog padha hai?? Ye Poonarjanm (REBIRTH) ki satya ghatna par aadhaarit ek prem kahani hai!!! http://naayika.mywebdunia.com/
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Re: सिर्फ तुम पर है !!!
Om Arya
द्वारा 29 नवंबर, 2008 3:20:26 PM IST पर टिप्पणी
#
मैं कविताये ही पढ पाता हूँ. आपके पूछने पे कोशिश की. शायद आप नायिका की बात कर रही है. पर चित्रों की वजह से असुविधा हों रही है समझने में. ध्यान से पढ के ही प्रतिक्रिया दूँगा
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Re: सिर्फ तुम पर है !!!
Basant Arya
द्वारा 29 नवंबर, 2008 4:44:30 PM IST पर टिप्पणी
#
एक हसीन लडकी की तरह खुबसुरत है,आपकी कविता.
अस्वीकरण
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