लकड़ियाँ जोड़ी ऊपले लगाए, तीलियाँ फूँकी केरोसिन भी डाला, पर ,आँच जली नहीनींद कच्ची ही रही. चाहिए थी एक पकी नींद दिन भर दौड़ में लगे रहे ख्वाबों कोआराम फरमाने के वास्तेपर, खयाल में कुत्ते रोते रहे और लाख लतियाने पे भी भागे नही सुबह चाय पीते हुए उनींदे मन ...
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