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29 अगस्त, 2008


ब्लॉग्स (1)
घर की अलगनी पे अंबार लगता जा रहा है एक के ऊपर एक गीली सोंचों का मैने खोल दिए हैं सारे दरवाजे, खिड़कियां और छत कोई भी गुंजाइश नही छोड़ी है किसी भी धूप के टुकड़े के लिए आसान है सोंचों को गीला छोड़ देना मगर फिर कितनी देर टिकी रहेगी अलगनी !! आगे पढ़ें...