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16 अगस्त, 2008


ब्लॉग्स (2)
हम साथ साथ नही भाग पायेबचपन मेंटिकोले लुटने या अमरूद तोडने के वास्तेना हमने आपस में मार- पीट कीकभी पतंग के लियेना छीना झपटी कभीवो मुझसे पांच साल बडा थाऔर वक्त के अंतर नेहमारी प्राथमिकताये अलग कर दी थीजब मैं अमरूद के पेंडो के इर्द्- गिर्द घूम रहा थावो शायद ... आगे पढ़ें...

ऊग आयी है फसलबीज जो संकुचित था अपने खोल मेंफूट कर बाहर आ गया हैएक नयी आशा जगाता हुआमाटी आज अहोभाव से भरीताक रही हैसूरज के तरफसूरज भी अपने जलन का मुल्य पा चुका हैअपना जला कर भीअपना गला कर भीकुछ पैदा कर देता है कोइ जबतोकितनी तसल्ली होती है. आगे पढ़ें...