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13 अगस्त, 2008


ब्लॉग्स (1)
भूख थे वहाँ कतार में खड़े और पेट उनके, आग में पक रहे थे चेहरे पहले लार लार हुएफिर सूख कर लटक गयेइंतेज़ार में, जीभ पपड़ीदार हुए फिरआस में भोजन केमगर शर्म नही आयी उसे.वो भीतर आसन पे विराजमान अपनेदप-दप करते चेहरे के साथ मजे से चढ़ावे खाता रहा. आगे पढ़ें...