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कुछ और दर्द



दिल से जो चले गये,
उन दर्दों के लिए,
जाने क्यूँ
कभी-कभी
दिल बड़ा बेकरार रहता है

और जो गये नही अब तक
वो बैठे हैं जाम लेके
होश उनको जरा
नागवार रहता है.

कुछ ऐसे भी दर्द हैं
जो पड़े हैं बरसों से,
पत्ते खेलने के लिए जिन्हें, शाम को
कुछ और दर्दों का
इंतिज़ार रहता है.

सुबह उठता हूँ तो
देखता हूँ, हर रोज
अखबार में कोई दर्द में भींगा
समाचार रहता है

फिर भी अगर जीता हूँ तो
इसलिये कि
हर पल बदन पे तेरे बोसो का
स्पर्श बरकरार रहता है.

प्रतिक्रियाएँ

Re: कुछ और दर्द
achchi rachna....
Re: कुछ और दर्द
sadhanyabad sweekar karta hoon. aabhar
अस्वीकरण