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गुजारिश



नींद औंधा पड़ा है
रजाई में सिकुड़ कर,

बाहर,
आंगन में
नींद से बिछुड़े हुए ख्वाब
टूट-टूट कर
गिर रहे हैं

निहायत बेकार सा कोई वक़्त
अपने टखने में
दर्द लिए चल रहा है.

ऐसे में
तुम्हारे
हाथों से एक कप चाय
हो जाये अगर...
अस्वीकरण