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11 अगस्त, 2008


ब्लॉग्स (1)
नींद औंधा पड़ा है रजाई में सिकुड़ कर, बाहर, आंगन में नींद से बिछुड़े हुए ख्वाब टूट-टूट कर गिर रहे हैं निहायत बेकार सा कोई वक़्त अपने टखने में दर्द लिए चल रहा है. ऐसे मेंतुम्हारेहाथों से एक कप चाय हो जाये अगर... आगे पढ़ें...