बेबकूफ आदते
जीवन के सारे स्वाद
हो चुके हैं नीम,
मीठे स्वाद की याद
बच नही पाएगी अब और ज्यादा देर.
साँसों की यात्रा में
दूर दूर तक फैला हुआ कोलतार है
दममें की उठा पटक है
धुआँ है, गुबार है
भयाक्रांत है
बची हुई थोड़ी सी पारदर्शी हवा
हम, तुम, सब जानते हैं
हवा, पानी और जंगल के बारे में
कि वे नही रहेंगे एक दिन
सिर्फ ये नही जानते कि पहले कौन जाएगा.
हम, तुम, सब हैं
घिरे, डरे हुए
प्रलय की आशंकाओं से.
और साथ हीं साथ लाचार भी
अपनी आदतों से
अपनी बेबकूफ आदतों से.

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