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8 अगस्त, 2008


ब्लॉग्स (1)
जीवन के सारे स्वाद हो चुके हैं नीम, मीठे स्वाद की याद बच नही पाएगी अब और ज्यादा देर. साँसों की यात्रा में दूर दूर तक फैला हुआ कोलतार है दममें की उठा पटक है धुआँ है, गुबार है भयाक्रांत है बची हुई थोड़ी सी पारदर्शी हवा हम, तुम, सब जानते हैं हवा, पानी और ... आगे पढ़ें...