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7 अगस्त, 2008


ब्लॉग्स (1)
अभी से शायद कुछ देर पहले हीं उसने अपनी हीं बनाई दुनिया को बेसहारा कर दिया और ये दुनिया चरमरा कर गिरने लगी. अहं का ये कैसा घिनौना प्रदर्शन कि हमारे कान टूटने के शोर से भर गये !!!मैं उसका विरोध करता हूँ क्यों कि वो जब-तब हाथ खींचता रहता हैअपनी हीं बनाई ... आगे पढ़ें...