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1 अगस्त, 2008


ब्लॉग्स (1)
वो कुछ हाथ थे, जो निकल गये हाथ से वो कुछ हाथ थे मैं चाहता हूँ कि, जो मेरा कंधा ले लें फिर से अपने घेरे में. वो कुछ हाथ थे जो अक्सर, स्कूल जाते वक़्त कंधे घेर कर लटक जाते थे दूसरी तरफ वे कुछ हाथ थे जो लगभग रोज बाँट लेते थे चाट और पानी-पूड़ी, अमरूद और ... आगे पढ़ें...