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क्यूँ टूट गये???


वो रिश्ते जिनके बीज
ख्वाब में गिर कर हीं रह गये
मेरी माटी नही छू पाए
उन रिश्तों की पौध
ऊग आई है
आज मेरे सूने आंगन के एक कोने में

मैं हाथ नही लगाता
उनकी पाकीज़ा कोंपलों पे,
डरता हूँ, अपने हक के बारे में सोंच कर.

सिर्फ सुनने की कोशिश करता हूँ उन्हे
हाथ में आ जाए शायद कोई स्वर.

वे खुल कर बोलती नही


चुपके से दलील मांगती हैं,
सवाल पूछती हैं कि क्या हुआ,
क्यूँ टूट गये
जरा सा करवट बदलने में हीं ???

प्रतिक्रियाएँ

Re: क्यूँ टूट गये???
कहाँ से तोड़ लाये ये टूटा हुआ खूबसूरत ख्वाब .......
Re: क्यूँ टूट गये???
meri hin shakhon se jhaDe hue hain ye, kareeb hin rahte hain sab shaifali ji.
अस्वीकरण