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31 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
वो रिश्ते जिनके बीज ख्वाब में गिर कर हीं रह गये मेरी माटी नही छू पाए उन रिश्तों की पौध ऊग आई है आज मेरे सूने आंगन के एक कोने में मैं हाथ नही लगाता उनकी पाकीज़ा कोंपलों पे, डरता हूँ, अपने हक के बारे में सोंच कर. सिर्फ सुनने की कोशिश करता हूँ उन्हे हाथ में ... आगे पढ़ें...