मैं कृतग्य हूँ
मैं कृतग्य हूँ
मैं कृतग्या हूँ
उस जीवन के प्रति
जो मुझमें
और तमाम अन्य जीवों में
लगातार साँसें ले रहा है
मैं कृतग्य हूँ
उस सूरज के प्रति
जिसने ऊर्जा भेजने में
कभी कोई चूक नही की
और जिसके बिना अकल्पनीय थी हमारी सर्जना
मैं कृतग्य हूँ
उस प्रकृति के प्रति
जिसने हवा, पानी, पेड़, बादल बिजली, बारिश, फूल और खूशबू जैसी चीजें बनाई
और उन पे किसी का जोर नही रखा.
मैं कृतग्य हूँ
प्रत्येक सृजन और उसके लिए मौजूद मिट्टी के प्रति
मैं आँसू, हंसी, शब्द, शोर और मौन जैसी
चीज़ो के प्रति भी कृतग्य हूँ
जो मेरी कविता का हिस्सा बनते हैं
और अन्त में
उन सब चीज़ो के प्रति
जो अस्तित्व में हैं और जिनकी वजह से दुनिया सुंदर बनी हुई है
पर जो यहाँ, इस कविता में नही आ पाए
जैसे स्त्री और बच्चे
मैं कृतग्य हूँ.

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