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मैं कृतग्य हूँ


मैं कृतग्य हूँ

मैं कृतग्या हूँ
उस जीवन के प्रति
जो मुझमें
और तमाम अन्य जीवों में
लगातार साँसें ले रहा है

मैं कृतग्य हूँ
उस सूरज के प्रति
जिसने ऊर्जा भेजने में
कभी कोई चूक नही की
और जिसके बिना अकल्पनीय थी हमारी सर्जना

मैं कृतग्य हूँ
उस प्रकृति के प्रति
जिसने हवा, पानी, पेड़, बादल बिजली, बारिश, फूल और खूशबू जैसी चीजें बनाई
और उन पे किसी का जोर नही रखा.

मैं कृतग्य हूँ
प्रत्येक सृजन और उसके लिए मौजूद मिट्टी के प्रति

मैं आँसू, हंसी, शब्द, शोर और मौन जैसी
चीज़ो के प्रति भी कृतग्य हूँ
जो मेरी कविता का हिस्सा बनते हैं

और अन्त में
उन सब चीज़ो के प्रति
जो अस्तित्व में हैं और जिनकी वजह से दुनिया सुंदर बनी हुई है
पर जो यहाँ, इस कविता में नही आ पाए
जैसे स्त्री और बच्चे
मैं कृतग्य हूँ.


प्रतिक्रियाएँ

Re: मैं कृतग्य हूँ
मैं भी कृतज्ञ हूँ
Re: मैं कृतग्य हूँ
aapne bhi is dunia ko khoobsoorat banane men apna kaafi yogadan diya hai shaifaly ji.
Re: मैं कृतग्य हूँ
bahut khoob.. bahut khoob.. wakai bahut badi saugaton par bahut badee baat likh dee saab aapane.. Fantastc!!!
Re: मैं कृतग्य हूँ
hausal-afzai ke liye bahut shukriya aayush ji.
Re: मैं कृतग्य हूँ
आपकी कविता एक प्रार्थना है उन सब के प्रति जिनसे जीवन बनता और बिगड़ता है। वैदिक ऋषि भी इसी तरह प्रकृति की प्रार्थना किया करते थे।
Re: मैं कृतग्य हूँ
maine to aaj karne ki koshish ki hai shatayu ji. aapne sahi kaha.
अस्वीकरण