अपनी तनहाई से टिक कर
तुम अपना सिर
टिकाओ तो सही
देखो,
मैं अपना कंधा बढ़ा चुका हूँ.
देखो जरा गौर से,
मेरे शरीर का रोम-रोम
तुम्हारे दर्द सोखने को
तैयार खडे हैं.
तुम अपना हाथ
मेरे हाथों में रख दो,
मेरा वादा है
तुम्हारी लड़खड़ाहट को
अपनी कदमों पे ले लूँगा
हाँ, दे ही दो तुम
मुझे अपनी सारी तन्हाइयां
कि मैं यहीं हूँ
तुम्हारे पास ख़ड़ा
अपनी तनहाई से टिक कर.

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