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28 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
तुम अपना सिर टिकाओ तो सही देखो, मैं अपना कंधा बढ़ा चुका हूँ. देखो जरा गौर से, मेरे शरीर का रोम-रोम तुम्हारे दर्द सोखने को तैयार खडे हैं. तुम अपना हाथ मेरे हाथों में रख दो, मेरा वादा है तुम्हारी लड़खड़ाहट को अपनी कदमों पे ले लूँगा हाँ, दे ही दो तुम मुझे ... आगे पढ़ें...