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25 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
शहर या तो अलग अलग क़तारों में ख़ड़ा है बंटा हुआ, याफिर उपस्थित हैदौड़ता हुआ भागदौड़ क़ी परिधि पे, अपनी पूरी थकान के बाबजूद शहर को मैने कभी फुरसत में नही देखा ना हीं कभी एकजुट. बहुत बड़ी-बड़ी कतारें उपस्थित हैं बहुत छोटी-छोटी जगहों में जगह के बीच से जगह ... आगे पढ़ें...