सामना
एक डगमगाता हुआ विश्वास
गिर कर टूट जाने के लिए
है एक दम बेताब
एक उबलती हुई सनसनी
फैल जाने के लिए
है एक दम तैयार
छोटी छोटी नाकामियों पर
एक क्रोध
हर समय आपे से बाहर होता हुआ
जैसे बैठा हो
गेहूंवन कि लिबलीबी पर
दया, प्रेम, करुण और मुस्कान
सब सतही, नियत और नियंत्रित
हर उम्मीद मार खाती हुई
हर तलाश लड़खड़ाती हुई
और
हर अफसोस निर्लज्ज होता हुआ
मुझे मिल जाते हैं ये सब
हर रोज कहीं ना कहीं
मेरी यात्रा के दौरान.
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