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24 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
एक डगमगाता हुआ विश्वास गिर कर टूट जाने के लिए है एक दम बेताब एक उबलती हुई सनसनी फैल जाने के लिए है एक दम तैयार छोटी छोटी नाकामियों पर एक क्रोध हर समय आपे से बाहर होता हुआ जैसे बैठा हो गेहूंवन कि लिबलीबी पर दया, प्रेम, करुण और मुस्कान सब सतही, नियत और ... आगे पढ़ें...