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21 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
कुछ मैं नही छोड़ पाया था कुछ वो भी नही छोड़ पाई थी और इस तरह हम छूट गये थे एक दूसरे से जब धार पे ख़ड़ा हो तो कितनी देर रुका रह सकता है कोई बिना बहे, और उस धार में तो हम तिनकों जैसे थे. वो जो हम नही छोड़ पाए थे तब वो सब भी छूट गये धीरे धीरे वक़्त ने नयी ... आगे पढ़ें...