Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

इतना भी नही सूखा कभी


यादें रुकती नही हैं तब भी नही रुकी थी वे
बरसती रही थी आँखों के कोरों से
सुबक-सुबक कर.

रुकी तो वो भी नही थी
चली गयी थी आँखों से निकल कर
अपनी ज़िद में
सब छोड़ कर

सब बह गया, बुझ गया था
धीरे धीरे सूख गया सब समय के साथ

पर इतना भी नही सूखा कभी कि
फिर कोंपलें नही आ सके.




अस्वीकरण