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तेरे चले जाने के बाद का अंतराल है ये



तेरे चले जाने के बाद का अंतराल है ये
अंतराल, जहाँ है
हर शै में लिपटी तेरे साथ गुजारी संपूर्णता
बिस्तर पे फैला हुआ अंतहीन संतोष
भेलवेटी सोफे पे आकार में ढली तेरी सांस और सोंच की उष्णता
भरा हुआ आंगन और किचेन

ऑफीस से लौटने के बाद कभी
गर दिख भी जाता है सन्नाटा
या सूना सा कुछ
तो भर देता हूँ उसे
गमले की मिट्टी से और नाजुक पौधों से

घर का नक्शा वैसा ही बनाए रखा है
जैसा तुम चाहती थी कि रहे

तुम्हारे टूटे बालों को
रख रखा है भर कर एक डिब्बी में
और उखरने नही दी है वो बिंदी
जो तुमने बाथरूम की दीवार पे चिपका दी थी
कभी कभी छू लेता हूँ उसको
जब तुम्हारा स्पर्श बदन पे कम लगने लगता है

तुम अभी भी यहीं हो
हालांकि ये तुम्हारे चले जाने के बाद क अंतराल है.
अंतराल क्योंकि तुम्हे फिर तो आना हीं है.



प्रतिक्रियाएँ

Re: तेरे चले जाने के बाद का अंतराल है ये
आपकी कविताएं पढ़ता रहा हूं। आप अपनी अभिव्यक्ति के लिए सचमुच नई राहे खोजने की कोशिश करते भी दिखाई पड़ते हैं। एक कवि के लिए सिर्फ अभिव्यक्त करते रहना ही जरूरी नहीं बल्कि नई राहें भी खोजना पड़ती हैं ताकि वह अपने को हमेशा नए तरीके से व्यक्त करते हुए नया बना रहे। ऐसा नहीं करने पर वह दोहराव का शिकार भी हो सकता है। मुझे आशा है एक कवि के नाते आप इस आशंका के प्रति सचेत भी होंगे।
Re: तेरे चले जाने के बाद का अंतराल है ये
ravindra ji, aapki pratikriya-yen bahut satik hain aur main unse ittefaq bhi rakhta hoon. shayad koshish bhi karta hoon, par jane kyun laut-laut kar unhi raaston pe pahunch jaata hoon. bas yahi chahata hoon ki jab aapko meri koshish najar aaye to jaroor batana, please!
Re: तेरे चले जाने के बाद का अंतराल है ये
इस कविता को जिन भावों के साथ अभिव्यक्त किया गया है वह काबिलेतारीफ है।
Re: तेरे चले जाने के बाद का अंतराल है ये
main aabhar prakat karta hoon, aapki tarif ke liye.
अस्वीकरण