तेरे चले जाने के बाद का अंतराल है ये
तेरे चले जाने के बाद का अंतराल है ये
अंतराल, जहाँ है
हर शै में लिपटी तेरे साथ गुजारी संपूर्णता
बिस्तर पे फैला हुआ अंतहीन संतोष
भेलवेटी सोफे पे आकार में ढली तेरी सांस और सोंच की उष्णता
भरा हुआ आंगन और किचेन
ऑफीस से लौटने के बाद कभी
गर दिख भी जाता है सन्नाटा
या सूना सा कुछ
तो भर देता हूँ उसे
गमले की मिट्टी से और नाजुक पौधों से
घर का नक्शा वैसा ही बनाए रखा है
जैसा तुम चाहती थी कि रहे
तुम्हारे टूटे बालों को
रख रखा है भर कर एक डिब्बी में
और उखरने नही दी है वो बिंदी
जो तुमने बाथरूम की दीवार पे चिपका दी थी
कभी कभी छू लेता हूँ उसको
जब तुम्हारा स्पर्श बदन पे कम लगने लगता है
तुम अभी भी यहीं हो
हालांकि ये तुम्हारे चले जाने के बाद क अंतराल है.
अंतराल क्योंकि तुम्हे फिर तो आना हीं है.
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