तेरे चले जाने के बाद का अंतराल है ये अंतराल, जहाँ है हर शै में लिपटी तेरे साथ गुजारी संपूर्णता बिस्तर पे फैला हुआ अंतहीन संतोष भेलवेटी सोफे पे आकार में ढली तेरी सांस और सोंच की उष्णता भरा हुआ आंगन और किचेन ऑफीस से लौटने के बाद कभी गर दिख भी जाता है ...
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