यहाँ कोई नाम नही है
जिसे मैं पुकार लूँ थोड़ी देर के लिए
और वो आ जाए थोड़ी देर के लिए
यहाँ कोई कंधा भी नही है
जो टिका ले मेरा हाथ कुछ देर के लिए
यहाँ गलियाँ, मुहल्ले और सड़कें भी नही है
जहाँ आदमी बचता हो आदमी के लिए
गैर तो गैर,
मुझे कई बार लगता है
कि यहाँ मैं भी नही हूँ खुद के लिए.