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9 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
जब जब मैं उदास हुआ वो भी हुआ उसने अपनी लहरें खोल दी समेटने के लियेमेरी बेचैनियों और उदासियों को. जब मैं रोना चाहता था पर आँसू नही होते थे तो उसने आंखो को आंसू दिये और घंटों तक अपने कंधे का किनारा दिया. हमने देखा है और वो समेटता रहता है अपनी लहरें फैला ... आगे पढ़ें...