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ख्वाहिश- एक छोटी सी



हो एक शहर छोटा सा
और उसमे एक घर छोटा सा
जिसमे हवा से हल्की दीवारें
और रोशनी की खिड़कियाँ

खुशबु तक की पगडंडी हो वहाँ से
और रातें हल्की-हल्की ठंढी हो वहाँ पे

परछाइयां बिगड़ती ना हो
तन्हाइयां ठहरती ना हो
सीधी सफेद बातें हो
धुन में लिपटी रातें हों

रिश्तों की लंबी डगर हो वहाँ से
आँधियों को ना हो कोई मंज़र वहाँ पे

वक़्त के परिंदे उड़ते हो धीरे
ओस से भींगे रहते हों सवेरे

हो एक शहर छोटा सा
और उसमे एक घर छोटा सा
जिसमे हवा से हल्की दीवारें
और रोशनी की खिड़कियाँ


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