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7 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
हो एक शहर छोटा साऔर उसमे एक घर छोटा सा जिसमे हवा से हल्की दीवारें और रोशनी की खिड़कियाँ खुशबु तक की पगडंडी हो वहाँ से और रातें हल्की-हल्की ठंढी हो वहाँ पे परछाइयां बिगड़ती ना हो तन्हाइयां ठहरती ना हो सीधी सफेद बातें हो धुन में लिपटी रातें हों रिश्तों की ... आगे पढ़ें...