अपने लिये थोड़ी धूप
धूप लादे हुए अपने पीठ पर
चलते रहने का किरदार मिला मुझे.
पहुँचाने का, उन-उन हिस्सों में धूप
जहाँ कोई रुकावट हो रोशनी के लिए
मैं जहाँ भी गया
बिठाया गया मुझे एक अहम किरदार मान कार
चलता रहा मैं भी
जोश में बिना थके, बिना रुके
खुशी-खुशी
पर चलते हुए ये भूल गया की
अपनी भी परछाई बनानी जरूरी है.
लोड हो रहा है...