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5 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
धूप लादे हुए अपने पीठ पर चलते रहने का किरदार मिला मुझे. पहुँचाने का, उन-उन हिस्सों में धूपजहाँ कोई रुकावट हो रोशनी के लिए मैं जहाँ भी गया बिठाया गया मुझे एक अहम किरदार मान कार चलता रहा मैं भी जोश में बिना थके, बिना रुके खुशी-खुशीपर चलते हुए ये भूल गया की ... आगे पढ़ें...