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मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना था
प्रतिक्रियाएँ[2]
Om Arya
द्वारा 3 जुलाई, 2008 8:51:00 AM IST पर पोस्टेड
#
मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना था
जिस्म से रूह पर अभी फिसला ही था
अभी देखा भी नही था उसे आंख भर
कि धकेल दिया तुमने मुझे बाहर....
मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना था
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तेरे साहिल पर
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Re: मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना था
Deepesh
द्वारा 4 जुलाई, 2008 10:46:56 AM IST पर टिप्पणी
#
रोक तो लेते तुम्हे हम अपनी रूह से लगा कर पर क्या करते इस रूह को तुम्हसे पहेली किसी और का होना था
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Re: मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना था
Om Arya
द्वारा 13 अगस्त, 2008 6:07:16 PM IST पर टिप्पणी
#
aapne rok hi liya samjho
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